कटनी। शहर को हाल ही में नया यातायात प्रभारी मिला। उम्मीद जगी कि सड़कों पर बेतरतीब खड़े वाहन हटेंगे, जाम की समस्या कम होगी और प्रमुख स्थानों पर यातायात व्यवस्था बेहतर दिखाई देगी। लेकिन जिला अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के गेट के सामने ऑटो चालकों ने सड़क को ही अपना अस्थायी स्टैंड बना लिया है। अस्पताल आने वाले मरीज, उनके परिजन और अन्य वाहन चालक रोजाना इस अव्यवस्था का सामना करने को मजबूर हैं। सड़क का बड़ा हिस्सा ऑटो वाहनों से घिरा रहता है, जिससे आवाजाही प्रभावित होती है और अस्पताल परिसर के बाहर हर समय अव्यवस्थित माहौल बना रहता है।
सबसे बड़ा सवाल यातायात विभाग की प्राथमिकताओं पर खड़ा हो रहा है। नए यातायात प्रभारी के आने के बाद शाम होते ही निरीक्षण, भ्रमण और तस्वीरों का सिलसिला जरूर दिखाई देता है। सोशल मीडिया और प्रेस विज्ञप्तियों में यातायात सुधार के दावे भी नजर आते हैं, लेकिन दिनभर जिला अस्पताल गेट पर पसरी अव्यवस्था शायद जिम्मेदारों की नजर से दूर है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यातायात व्यवस्था सुधारने का अभियान वास्तव में जमीन पर चल रहा है तो उसकी शुरुआत जिला अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान से होनी चाहिए थी। जहां रोज सैकड़ों मरीज पहुंचते हों, वहां सड़क पर इस तरह वाहनों का जमावड़ा कई सवाल खड़े करता है।
शहर में आम वाहन चालकों पर नियमों का पालन कराने के लिए चालान और कार्रवाई की जाती है, लेकिन अस्पताल गेट के सामने लंबे समय से बनी यह स्थिति कार्रवाई के दायरे से बाहर क्यों है, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। लोगों का कहना है कि व्यवस्था सुधार कैमरे के सामने नहीं, सड़क पर दिखाई देना चाहिए।
नए यातायात प्रभारी को शहर का नया चेहरा माना जा रहा है, लेकिन जिला अस्पताल गेट की यह तस्वीर बता रही है कि अभी भी कई जगहों पर व्यवस्था पुराने ढर्रे पर ही चल रही है। यदि जिम्मेदार वास्तव में यातायात व्यवस्था को सुधारना चाहते हैं तो उन्हें शाम के निरीक्षणों से आगे बढ़कर दिन में उन स्थानों पर भी नजर डालनी होगी, जहां आम जनता रोज परेशानी झेल रही है।
अब सवाल यही है कि जिला अस्पताल गेट पर पसरी यह अव्यवस्था कब तक बनी रहेगी और नए यातायात अमले की सक्रियता तस्वीरों से निकलकर जमीनी हकीकत में कब दिखाई देगी?
