मनरेगा के नाम और स्वरूप में बदलाव का कांग्रेस ने किया विरोध, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

Editor National news tv
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कटनी। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम एवं मूल स्वरूप में प्रस्तावित बदलाव को लेकर कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। जिला कांग्रेस कमेटी कटनी (शहर) के नेतृत्व में राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया।

ज्ञापन में कांग्रेस ने कहा है कि मनरेगा केवल एक रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों, श्रमिकों और वंचित वर्ग के लिए आजीविका की गारंटी और सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार है। यह कानून ऐतिहासिक, अधिकार आधारित और जनकल्याणकारी अधिनियम है, जिसने करोड़ों ग्रामीण परिवारों को सम्मानजनक रोजगार और आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है।

कांग्रेस का कहना है कि अधिनियम के नाम और इसके मूल स्वरूप में परिवर्तन का प्रयास न केवल महात्मा गांधी के विचारों को कमजोर करता है, बल्कि इससे श्रमिकों के कानूनी अधिकारों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि योजना की जिम्मेदारियों को राज्यों पर स्थानांतरित करना संघीय ढांचे की भावना के विपरीत है, जिससे राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा और अंततः इसका सीधा नुकसान गरीब और मजदूर वर्ग को झेलना पड़ेगा।

ज्ञापन के माध्यम से  कांग्रेस ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया गया है कि संविधान में निहित सामाजिक न्याय, समानता और जनकल्याण की भावना को ध्यान में रखते हुए इस विषय में हस्तक्षेप किया जाए, ताकि मनरेगा का नाम, स्वरूप और मूल भावना यथावत बनी रहे तथा श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित रहें।

कांग्रेस नेताओं ने विश्वास जताया कि इस जनहित के मुद्दे पर राष्ट्रपति सकारात्मक और न्यायोचित निर्णय लेकर करोड़ों गरीब एवं श्रमिक परिवारों के हितों की रक्षा करेंगे।

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