अवैध प्लाटिंग का संगठित खेल, प्रशासनिक मौन में फल-फूलती भूमाफियागिरी,कृषि भूमि को कॉलोनी में बदलने की साजिश, नियम-कानून बेअसर, निगरानी तंत्र पर सवाल

Editor National news tv
0


कटनी।जिले में अवैध प्लाटिंग का धंधा अब संगठित स्वरूप लेता नजर आ रहा है। राजस्व निरीक्षक मंडल मुड़वारा नम्बर -01 के ख़िरहनी मे खसरा नम्बर 557/3 अंतर्गत कृषि भूमि पर नियम-कानूनों को खुलेआम ठेंगा दिखाकर प्लाट काटे जा रहे हैं। बिना डायवर्जन, बिना ले-आउट स्वीकृति और बिना कॉलोनाइजर पंजीयन के कॉलोनी बसाने की साजिश ने प्रशासनिक नियंत्रण और निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार संबंधित भूमि का दर्जा आज भी कृषि ही दर्ज है, लेकिन मौके पर सड़क निर्माण, सीमांकन और प्लाट चिन्हांकन जैसे कार्य तेजी से चल रहे हैं। संभावित खरीदारों को विकसित कॉलोनी का सपना दिखाकर सौदे तय किए जा रहे हैं, जबकि हकीकत में यह पूरा तंत्र नगर एवं ग्राम निवेश अधिनियम और राजस्व नियमों की खुली अवहेलना है।

नियम कागजों में, जमीन पर अराजकता

कॉलोनी विकास के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया स्पष्ट और बाध्यकारी है।इसके बावजूद जमीनी हकीकत इसके उलट दिखाई दे रही है। यह स्थिति बताती है कि या तो निगरानी तंत्र शिथिल है या फिर भूमाफिया तंत्र के आगे बेबस।

राजस्व अमले की भूमिका पर गहराता संदेह

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अवैध गतिविधियों की जानकारी संबंधित विभागों को होने के बावजूद न तो समय रहते निरीक्षण हुआ और न ही  रोक लगी। कार्रवाई के अभाव ने भूमाफियाओं के हौसले बुलंद कर दिए हैं और प्रशासनिक निष्क्रियता की तस्वीर और गहरी होती जा रही है।

आम लोगों के सपनों से खिलवाड़
अवैध प्लाटिंग में निवेश करने वाले नागरिकों के लिए यह भविष्य में बड़े संकट का कारण बन सकता है।  न बुनियादी सुविधाओं की कानूनी गारंटी और न ही सुरक्षा अंततः खरीदार ही सबसे बड़ा शिकार बनता है।

तत्काल हस्तक्षेप की दरकार
स्थानीय लोगो का कहना हैँ कि मुड़वारा क्रमांक-01के ख़िरहनी क्षेत्र में चल रही अवैध प्लाटिंग की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर जिले में फैलते इस अवैध नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार किया जाए।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)