कटनी। मानसून की पहली तेज बारिश ने एक बार फिर ग्रामीण बिजली व्यवस्था की तैयारियों की पोल खोल दी। गुरुवार रात करीब 9 बजे जुहला फीडर की विद्युत आपूर्ति अचानक बंद हो गई, जिसके बाद जुहला, जुहली, सुरकी, पौड़ी, जुगियाकाप, देवरा खुर्द, मड़ई, नया गांव सहित आठ से अधिक गांवों में पूरी रात बिजली आपूर्ति ठप रही। समाचार लिखे जाने तक भी कई क्षेत्रों में बिजली बहाल नहीं हो सकी थी।
रातभर बिजली गुल रहने से ग्रामीणों को उमस भरी गर्मी, पेयजल संकट और अन्य आवश्यक कार्यों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई गांवों में लोग पूरी रात जागने को मजबूर रहे। अंधेरे के कारण बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक दिक्कत हुई, वहीं मोबाइल फोन तक चार्ज नहीं हो सके और पानी की मोटरें भी बंद रहीं।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश शुरू होते ही जुहला फीडर में तकनीकी खराबी आना अब आम बात बन गई है। हल्की बारिश या तेज हवा के बाद भी घंटों तक बिजली आपूर्ति बाधित रहती है और रात में फॉल्ट होने पर समय पर सुधार कार्य नहीं होने से पूरी रात अंधेरे में गुजर जाती है। लोगों का आरोप है कि हर वर्ष ऐसी ही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
हर साल मानसून से पहले बिजली विभाग द्वारा विद्युत लाइनों के रखरखाव, पेड़ों की छंटाई और आवश्यक मरम्मत के दावे किए जाते हैं। इसके बावजूद पहली ही बारिश में फीडर का ठप हो जाना विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते लाइनों का प्रभावी रखरखाव और फॉल्ट सुधार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती, तो ग्रामीणों को पूरी रात बिजली संकट नहीं झेलना पड़ता।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जुहला फीडर की तकनीकी खामियों की व्यापक जांच कर स्थायी समाधान किया जाए, ताकि हर बारिश में बिजली आपूर्ति बाधित होने की समस्या से लोगों को राहत मिल सके। अब देखना होगा कि बिजली विभाग इस बार केवल अस्थायी सुधार तक सीमित रहता है या फिर समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम उठाता है।
