कटनी। जिला अस्पताल किसी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ होता है।लेकिन कटनी जिला अस्पताल में जो तस्वीर सामने आ रही है। वह बेहद चिंताजनक है। अस्पताल परिसर और मुख्य प्रवेश द्वार के आसपास, निजी एम्बुलेंस चालकों का स्थायी डेरा साफ नजर आता है। यह स्थिति न केवल नियमों की अवहेलना है।बल्कि मरीजों की जान और जेब दोनों के साथ खिलवाड़ भी है। सूत्रों कि माने तों आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचे लोगों को सरकारी एम्बुलेंस की जानकारी तक नहीं दी जाती। इसके बजाय निजी एम्बुलेंस चालकों द्वारा पहले ही दबाव बना लिया जाता है। मजबूरी में परिजन मनमाना किराया चुकाने को विवश होते हैं। यह व्यवस्था सेवा नहीं, बल्कि सुनियोजित वसूली का रूप ले चुकी है।
जिला अस्पताल परिसर में केवल अधिकृत और सरकारी एम्बुलेंसों को ही मरीज परिवहन की अनुमति है। इसके बावजूद निजी एम्बुलेंसों की खुलेआम मौजूदगी यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर इस अवैध व्यवस्था को संरक्षण कौन दे रहा है? क्या यह सब प्रशासन की आंखों के सामने हो रहा है, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?
सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिला अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर प्रशासनिक नियंत्रण लगभग नदारद नजर आता है। यदि यही हाल रहा तो गरीब, ग्रामीण और आपात मरीज सबसे अधिक प्रभावित होते रहेंगे। अब जनहित में यह अनिवार्य हो गया है कि निजी एम्बुलेंसों को तत्काल जिला अस्पताल परिसर से बाहर किया जाए और मरीजों को केवल सरकारी एवं नियंत्रित सेवाएं ही उपलब्ध कराई जाएं।
स्वास्थ्य सेवाओं को मुनाफे का माध्यम बनने से रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है। सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस जिम्मेदारी को निभाएगा, या फिर अस्पताल परिसर निजी एम्बुलेंस कारोबार का अघोषित केंद्र बना रहेगा?
