कटनी। नगर निगम क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग और कॉलोनी विकास पर अंकुश लगाने के दावे लगातार किए जाते हैं, लेकिन खिरहनी क्षेत्र स्थित खसरा नम्बर 557/3 का मामला इन दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है। पूर्व में समाचार प्रकाशित होने और मामला सार्वजनिक रूप से सामने आने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से यह प्रकरण एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।
जानकारी के अनुसार राजस्व निरीक्षक मंडल मुड़वारा क्रमांक-01 के अंतर्गत आने वाला ख़िरहनी के खसरा नम्बर 557/3 राजस्व अभिलेखों में कृषि भूमि के रूप में दर्ज बताया जा रहा है। इसके बावजूद मौके पर सड़क निर्माण, प्लॉटों का सीमांकन तथा भूखंडों के विक्रय संबंधी गतिविधियां संचालित होने की जानकारी सामने आ रही है। क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रही गतिविधियों को देखकर स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा है कि कृषि भूमि का स्वरूप बदले बिना ही उसे कॉलोनी के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
गौरतलब है कि इस मामले को लेकर पूर्व में भी समाचार प्रकाशित किए जा चुके हैं। खबरों के माध्यम से संबंधित विभागों का ध्यान आकर्षित किए जाने के बावजूद न तो मौके पर गतिविधियां थमीं और न ही किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने आई। ऐसे में नगर निगम और अन्य जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम क्षेत्र के भीतर यदि इस प्रकार की गतिविधियां खुलेआम संचालित हो रही हैं, तो निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। लोगों का आरोप है कि विकसित कॉलोनी और भविष्य में मिलने वाली सुविधाओं का भरोसा देकर भूखंडों का विक्रय किया जा रहा है, जबकि भूमि से संबंधित वैधानिक प्रक्रियाओं और अनुमतियों की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
भूमि एवं राजस्व मामलों के जानकारों का मानना है कि किसी भी कृषि भूमि को आवासीय उपयोग में लाने के लिए निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होता है। यदि आवश्यक स्वीकृतियों के बिना कॉलोनी विकसित की जाती है, तो भविष्य में खरीदारों को बुनियादी सुविधाओं, वैधानिक मान्यता और संपत्ति संबंधी विवादों का सामना करना पड़ सकता है।
शहर में अवैध प्लॉटिंग और कॉलोनाइजरों के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन खिरहनी के खसरा नम्बर 557/3 का मामला यह सवाल खड़ा कर रहा है कि आखिर खबरों के बाद भी जिम्मेदार विभाग सक्रिय क्यों नहीं हुए। अब देखना होगा कि नगर निगम और संबंधित विभाग इस मामले में कोई ठोस कदम उठाते हैं या फिर अवैध प्लॉटिंग का यह कारोबार इसी तरह जारी रहता है।
