कोतवाली के नाक के नीचे अपराधियों का तांडव..?अस्पताल से लाखों की चोरी का अब तक खुलासा नहीं, मुरली मेडिकल में चोरी पर FIR तक नहीं — पुलिस की निष्क्रियता ने कानून-व्यवस्था को बनाया मजाक

Editor National news tv
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कटनी।शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर एक नहीं, बल्कि दो घटनाओं ने ऐसा करारा प्रहार किया है कि कोतवाली थाना क्षेत्र खुद सवालों के घेरे में आ गया है। थाना से चंद कदमों की दूरी पर हुई चोरी की वारदातों ने यह साफ कर दिया है कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और पुलिस की पकड़ कमजोर।

पहली घटना 6 दिसंबर की है, जब जिला अस्पताल परिसर के स्टाफ क्वार्टर (H-5) में रहने वाली एक स्टाफ नर्स के सूने मकान को निशाना बनाते हुए चोरों ने लाखों रुपये के जेवरात और नगदी पर हाथ साफ कर दिया। दिनदहाड़े हुई इस वारदात का आज तक खुलासा नहीं हो सका है। महीनों बीत जाने के बाद भी पुलिस चोरों तक नहीं पहुंच पाई है, जिससे उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

दूसरी घटना 30 जनवरी की रात की है, जब कोतवाली थाना से महज कुछ कदमों की दूरी पर स्थित मुरली मेडिकल में अज्ञात चोरों ने छप्पर तोड़कर दुकान में हाथ साफ किया । चोर बेखौफ तरीके से भीतर घुसे, चोरी को अंजाम दिया और आसानी से फरार हो गए। लेकिन यहां पुलिस की लापरवाही का स्तर और भी चौंकाने वाला है।घटना के बाद आज तक मामला पंजीबद्ध तक नहीं किया गया है।

इन दोनों घटनाओं ने मिलकर कोतवाली क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। एक ओर महीनों बाद भी चोरी का खुलासा नहीं, तो दूसरी ओर गंभीर वारदात के बावजूद एफआईआर तक दर्ज नहीं।यह स्थिति आम लोगों में भय और आक्रोश दोनों पैदा कर रही है।

स्थानीय व्यापारियों, अस्पताल कर्मियों और रहवासियों का कहना है कि जब थाने के आसपास ही अपराधी बेखौफ होकर वारदात को अंजाम दे रहे हैं, तो पूरे शहर की सुरक्षा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। लोगों का आरोप है कि पुलिस सिर्फ औपचारिकता निभा रही है, जबकि अपराधियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल अब यही है—क्या यह महज लापरवाही है या फिर जानबूझकर मामलों को दबाया जा रहा है? क्या किसी को बचाने की कोशिश हो रही है? पुलिस की चुप्पी इन सवालों को और गहरा कर रही है।

यह घटनाएं अब सिर्फ चोरी की वारदात नहीं रह गई हैं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल बन चुकी हैं। अगर जल्द ही ठोस और पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ संकेत होगा कि कानून का खौफ खत्म हो चुका है और जिम्मेदार जवाबदेही से बच रहे हैं।

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