इसी बीच विभागीय सूत्रों के अनुसार, मुख्य स्टेशन चौराहे पर यातायात ASI मनीष बर्मन वाहन चालकों के विरुद्ध चालानी कार्रवाई में व्यस्त थे। सूत्रों का दावा है कि मनीष बर्मन पिछले पांच वर्षों से अधिक समय से यातायात शाखा में पदस्थ हैं और शहर के प्रमुख मार्गों की संवेदनशीलता से भली-भांति परिचित हैं।
शहर में अब सवाल यह उठ रहा है कि जब चांडक चौक जैसा महत्वपूर्ण मार्ग जाम से जूझ रहा था और एक एम्बुलेंस रास्ता पाने के लिए संघर्ष कर रही थी, तब यातायात अमले की प्राथमिकता आखिर क्या थी? क्या उस समय जाम खुलवाना अधिक आवश्यक था या चालानी कार्रवाई?
विभागीय सूत्रों का यह भी दावा है कि शहर में चालानी कार्रवाई के नाम पर कथित अवैध वसूली की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
यह खबर चालानी कार्रवाई का विरोध नहीं करती, बल्कि उस समय की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाती है। यदि शहर के सबसे व्यस्त मार्ग पर लगे भीषण जाम को हटाने पर तत्काल ध्यान दिया जाता, तो संभव है कि एम्बुलेंस समेत अन्य वाहन चालकों को राहत मिलती।
अब निगाहें पुलिस प्रशासन पर हैं। सवाल यह है कि क्या रथ यात्रा के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन की रणनीति विफल रही, या फिर जाम में फंसे लोगों से अधिक प्राथमिकता चालानी कार्रवाई को दी गई? इस पूरे घटनाक्रम पर वरिष्ठ अधिकारियों का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है।